सदन की गरिमा को बढ़ाते डॉ. किरीट प्रेमजी भाई सोलंकी (एशिया पोस्ट श्रेष्ठ सांसद सर्वे 2017)

भारतीय जनता पार्टी नेता किरीट प्रेमजी भाई सोलंकी की गिनती उन चुनिंदा सांसदों में होती है जिन्हें जनता ने पहली बार के मुकाबले दूसरी बार ज्यादा वोटों से चुनकर लोकसभा भेजा हो। उन्हें जनता ने गुजरात की अहमदाबाद पश्चिम से 15वीं और16वीं लोकसभा में अपना प्रतिनिधि चुना गया है। यह सीट 2009 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आयी और वह यहां के पहले सांसद चुने गये। उनकी लोकप्रीयता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पहली ही बार में ही उन्हें एक लाख मतों से जीत हासिल हुई और दूसरी बार यह आंकड़ा साढ़े तीन लाख हो गया।
एक जनप्रतिनिधि के तौर पर वह सामाजिक न्‍याय, शिक्षा, स्‍वास्‍थय,विदेशी मामले, रेलवे, आधारभ्‍ाूत ढांचा और वित्‍तीय मामलों के आम जनता से जुड़े मुद्दे संसद में उठाते रहे हैं। पहली बार विपक्ष के सांसद के तौर पर उन्होंने स्वाइन फ्लू पर चर्चा की शुरूआत की। एट्रोसिटी एक्ट, रेलवे और बजट पर चर्चा में उन्होंने विशेष रुप से भाग लिया। उन्होंने प्राइवेट मेंम्बर रिजॉल्यूशन के माध्यम से महिलाओं पर होने वाले एसिड हमलों पर सुझाव दिए जिन्हें सरकार ने मानते हुए लागू भी किया। वह एचआईवी मरीजों के मुद्दे को भी प्राइवेट मेंबर बिल के जरिए संसद में चर्चा कर चुके हैं। इसके अलावा शिक्षा के बाजारीकरण रोकने, जाति रहित समाज व्यवस्था और डाकघरों को कोर बैंकिंग का दर्जा देने की मांग संसद में उठा चुके हैं।
अपने क्षेत्र का प्रतिनिधि होने के साथ साथ वह संसद की शहरी विकास की स्थाई समिति, राजघाट, अनुसूचित जातियों औरअनुसूचित जनजातियों के कल्‍याण, खेल और खाद्य मंत्रालय की परामर्श समिति, भ्‍ाारतीय नर्सिंग और भारतीय चिकित्‍सा अनुसंधान परिषद के सदस्य रहे. दूसरी बार सांसद चुने जाने के बाद वह सदस्‍य, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के कल्‍याण संबंधी समिति, वित्त मंत्रालय की स्थाई समिति और पेट्रोलियम मंत्रालय की परामर्श समिति के सदस्य के  हैं.
पेशे से चिकित्सक किरिट भाई सोलंकी का जन्म गुजरात के पाटन जिले के कम्बोली गांव में अपने ननिहाल में 17 जून 1950 को हुआ। शिक्षक पिता के व्यक्तित्व की छाप कुछ ऐसी रही कि उन्हेंने एमबीबीएस, एमएस की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एफआईसीएस की डिग्री हासिल करने के बाद भी शिक्षक बनना ज्यादा पसंद किया। राजनीति में आने से पहले वह 38 वर्ष तक सर्जरी के प्रोफेसर रहे और 2011-12 में उन्हें गुजरात सर्जन संगठन काअध्यक्ष चुना गया।  कीहोल सर्जरी या दूरबीन विधि से होने वाली सर्जरी में उन्हें महाराथ हासिल है। चिकित्सक और शिक्षक होने के साथ साथ सामाजिक कार्यों से भी वह हमेशा जुड़े रहे। वह पिछले38 सालों से गरीब और दलित वर्ग के करियर मार्गदर्शन के साथ-साथ  उन्हें मेडिकल की कोचिंग दे रहे हैं। किरिट भाई के मार्गदर्शन और कोचिंग की बदौलत कई गरीब छात्र मेडिकल और सर्जरी की पढ़ाई करने के बाद चिकित्सक के तौर पर समाज की सेवा कर रहे हैं। किरिट भाई समय समय पर मेडिकल तथा रक्तदान शिविरों के माध्यम से समाज की सेवा करते रहते हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने पौधारोपण और तंबाकू के प्रति जागरुकता अभियान भी चलाए हैं।
किरिट भाई संगीत के शौकीन हैं और पुराने हिंदी और गुजराती गानों में वह विशेष रुचि लेते हैं। खाली समय में वह क्रिकेट, टूरिज्म और सहित्यिक पत्रिकाएं और उपन्यास पढ़ना पसंद करते हैं। 2011 में किरिट भाई ने फ्रांस में आयोजित इन्‍टरनेशनल ग्‍लोबल टृयूबर क्‍यूलेसिस कान्‍प्रेस में हिस्सा लिया और तत्‍कालीन लोकसभा  अध्‍यक्ष के नेतृत्‍व में भारतीय संसदीय प्रतिनिधि मण्‍डल के सदस्‍य के रूप में कम्‍पाला में 136 के आई.पी.यू. सम्‍मेलन में भी शामिल हुए।