हर किसी की सेवा में तत्पर हैं पप्पू यादव (एशिया पोस्ट श्रेष्ठ सांसद सर्वे 2017)

कहते हैं अगर विरोधाभाषों में भी सार्थकता और सकारात्मकता को देखना है तो बिहार के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को देख लीजिये। मधेपुरा का प्रतिनिधित्व कर रहे ये 50 वर्षीय राजनेता 2014 में लोकसभा चुनाव जीतने से पहले 1991 से 2009 तक लगातार चार बार सांसद रह चुके हैं। उन्हें जमीन से जुड़ा राजनेता माना जाता है जो एक साधारण कार्यकर्ता के हक के लिये भी सड़क से संसद तक हर बात को मजबूती से उठाने में गुरेज नही करता। उनकी लोकप्रियता का आलम ये है कि जब 2009 में कुछ कानूनी अड़चनों की वजह से वे चुनाव नहीं लड़ पाये तो पांच साल बाद भी जनता ने 2014 में उन्हें जोरदार जीत दिलायी।

आनंदमार्ग के विचारों को अपने जीवन का दर्शन मानने वाले सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव की चर्चा उनके बेबाक, बेलौस अंदाज के कारण भी की जाती है। वे भारत ही नहीं दुनिया भर की कई स्वयंसेवी व सामाजिक संस्थाओं के जरिये गरीबों, पीड़ितों, शोषितों और रोगियों की भलाई में दिन रात कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने नयी दिल्ली के बलवंत राय मेहता लेन स्थित अपनी सरकारी कोठी को जिस तरह देश भर से इलाज के लिये राजधानी आने वाले परेशानहाल लोगों के लिये पनाहगार बना रखा है वो मानवता का एक अनूठा उदाहरण है। वहां लोगो को ऐम्स आदि अस्पतालों में इलाज के लिये मदद के साथ-साथ रहने और खाने की मुफ्त व्यवस्था वे खुद अपनी देख-रेख में करवाते हैं।

दिल्ली ही नहीं, इनके पटना स्थित आवास पर भी इलाज और अन्य मदद के लिये हर रोज आने वाले लोगों की संख्या 500-1000 होती है. वे जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक हैं और समग्र विकास की बात करते हैं। एक लम्बे संघर्ष के बाद राजनीति में अपनी पहचान बनाने वाले पप्पू यादव पॉंचवी बार सांसद बने हैं। इनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि बड़े किसान परिवार की रही है। इनके दादा स्वतंत्र भारत में खुर्दा पंचायत के प्रथम मुखिया थे। पिता चंद्र नारायण शिक्षा, समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य करने के साथ ही आनंदमार्ग के प्रमुख प्रचारक रहे हैं। पप्पू यादव की पढ़ाई सुपौल जिले के विद्यालय, आनंदपल्ली और आनंदपुर, भागलपुर में हुई। बाद में इन्होंने कजरा उच्च विद्यालय, कटिहार में पढ़ाई की। ये पहली बार 1990 में निर्दलीय विधानसभा का सदस्य चुने गये।

ये श्री आनंदमूर्ति प्रभात रंजन सरकार को अपना मानस ईश्वर मानते हैं और उनसे ही इन्होंने त्याग, सामाजिक दायित्व, नैतिकता का पाठ सीखा है। पप्पू यादव समाज सुधार के लिये चार महत्वपूर्ण कार्य करने को प्रयासरत हैं, जिनमें शिक्षा के स्तर को मजबूत बनाने के लिये हर सरकारी कर्मचारी व अधिकारी के बच्चों को सरकारी स्कूल में पढना व सरकारी कॉलेज में ही शिक्षण दिलवाना अनिवार्य करवाना सबसे महत्वपूर्ण मानते है। इसके लिए ये संसद में बिल भी लाने वाले हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिये ये ऐसा कानून चाहते हैं जिसके तहत किसी भी तरह की स्वास्थ्य जाँच/ स्वास्थ्य सेवा की कीमत चाहे प्राइवेट हो या सरकारी सिर्फ सरकार ही तय करे, जिससे सबको वाजिब दर पर उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवा भी मिल सके। ये अंतरजातीय विवाह को प्रोत्साहन व सरकार द्वारा इसे आर्थिक सहयोग दिलवाना को भी प्रयासरत हैं क्योंकि इनका मानना है कि इसके द्वारा जाति व धर्म की लड़ाई व भेदभाव को रोकने में कामयाबी मिलेगी। चौथा विचार पप्पू यादव कॉरपोरेट की जगह कोऑपरेटिव व्यवस्था लागू करवाना चाहते हैं, क्योंकि इनका मानना है कि गरीबी हटाने के लिये कोऑपरेटिव व्यापार व्यवस्था सबसे सशक्त माध्यम है। इनकी छवि एक मजबूत, लोकप्रिय और मददगार राजनेता की है जो जाति, धर्म, पार्टी, क्षेत्र से इतर जनता के लिये हर वक्त उपलब्ध रहते हैं। अपने मददगार स्वभाव के चलते वे कइयों के जीवन में बदलाव लाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं।

ये अब तक बच्चों की अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा, कोसी नदी पर पुल की मांग, देश में दलितों पर कथित अच्याचार, अरब देशों में फंसे भारतीयों की मदद, बिहार में बाढ़ आदि विषयों पर 175 से भी अधिक बहसों में हिस्सा ले चुके हैं। वे आधार कार्ड और इससे जुड़े समाज कल्याण के कार्यों, उन्नत भारत अभियान, वन भूमि पर प्रोजेक्ट, विदेशों में काला धन, वनवासी कल्याण योजनाए, साइबर सुरक्षा व भारत-पाक सीमा पर आतंकी हमले जैसे विषयों पर सदन में 259 प्रश्न उठा चुके हैं। हालांकि सदन में इनकी उपस्थिति 74 प्रतिशत ही रही है, लेकिन इसके लिये इनके क्षेत्र की समस्याओं और हर जगह उनके मौजूद रहने के स्वभाव को ही जिम्मेदार माना जाता है। पप्पू यादव को प्राइवेट बिल पेश करने में माहिर माना जाता है और वे इस बार 19 प्राइवेट मेम्बर बिल सदन में रख चुके हैं। ये संसद की कई स्थायी समितियों के सदस्य हैं जिनमें ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर प्रमुख हैं।

एशिया पोस्ट सर्वे – प्रभावशाली सांसद 2017 में सांसदों का जनता से जुड़ाव, प्रभाव, छवि, पहचान, कार्यशैली, सदन में उपस्थिति, बहस में हिस्सा, प्राइवेट बिल, सदन में प्रश्न, सांसद निधि का उपयोग व सामाजिक सहभागिता को मुख्य मापदंड बना कर किये गये सर्वे में राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को प्रमुख स्थान प्राप्त करने के लिये टीम फेम इंडिया की बधाई और शुभकामनाएं। (सर्वे स्टेक होल्ड तरीके से लोगों से पूछे गये पॉंच सवाल और लोकसभा की साइट पर उपलब्ध चार प्रमुख डाटा, कुल नौ बिंदुओं पर आधारित है।)