कुशल प्रबंधन क्षमता के धनी निशिकांत दुबे (एशिया पोस्ट श्रेष्ठ सांसद सर्वे 2017)

भाजपा के तेज तर्रार सांसद निशिकांत दुबे वैसे तो दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (एफएमएस) से एमबीए की डिग्री होल्डर हैं, लेकिन उनका कौशल नजर आया चुनाव प्रबंधन और अपने संसदीय क्षेत्र के विकास कार्यों के संपादन में. झारखंड के गोड्डा से दूसरी बार चुनाव जीतने वाले निशिकांत दुबे 16 वीं लोकसभा में सबसे अधिक प्राइवेट बिल लाने वाले सांसद के तौर पर जाने जाते हैं।
भागलपुर के भवानीपुर में 28 जनवरी 1969 को जन्मे निशिकांत दुबे की शिक्षा भागलपुर, देवघर और दिल्ली में हुई है। हालांकि राजनीति में उनका प्रवेश बेहद नाटकीय था। परिवार में राजनेताओं के नाम पर उनके मामा जनसंघ के जिला अध्यक्ष थे जबकि पिता कम्युनिस्ट विचारधारा के समर्थक थे। हालांकि वे स्कूल और कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद व भारतीय जनता युवा मोर्चा से जुड़े रहे थे, लेकिन मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करने के बाद वे एस्सार कंपनी में निदेशक बन गये और पूरी तरह से कॉरपोरेट लाइफ जीने लगे। फिर अचानक एक दिन भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा तो उन्होंने इसे एक चैलेंज के तौर पर लिया। उन दिनों पार्टी को बिहार-झारखंड में कुछ खास समर्थन हासिल नहीं था और झारखंड से भाजपा के सिर्फ एक ही सांसद थे, लेकिन निशिकांत दुबे ने चुनाव में अपनी पढ़ाई से हासिल कुशल प्रबंधन को अपना हथियार बनाया और अपनी बात जनता तक पहुंचाने में सफल रहे। 2009 के लोकसभा चुनाव में वे प्रदेश में भाजपा के बढ़ते प्रभाव के एक प्रमुख वाहक बने।

उन्होंने सांसद बनने के बाद न सिर्फ अपने क्षेत्र के बल्कि पूरे झारखंड के समुचित विकास के लिये अतुलनीय प्रयास किया। उनकी कोशिशों का ही नतीजा है कि प्रदेश में न सिर्फ ऑल इंडिया मेडिकल इंस्टीट्यूट की शाखा खुली है। आईटीआई और शिक्षण संस्थानों की झड़ी लग गयी है। उनकी कोशिशों का लाभ आम जनता तक पहुंचा और क्षेत्र के मतदाताों ने 2014 के चुनाव में भी उनपर भरोसा जताया। उन्हें संसद में सबसे ज्यादा प्राइवेट बिल लाने वाले सांसद के तौर पर पहचाना जाता है। उन्होंने 2014 से अब तक 29 प्राइवेट बिलों को पेश किया है। उनकी औसत उपस्थिति 97 प्रतिशत रही है जबकि उन्होंने 485 सवाल उठाये हैं। उन्होंने 240 बहसों में भागीदारी की है और सदन में उनकी छवि एक सक्रिय सदस्य की है। वे फाइनैंस मामलों की संसदीय समिति के सदस्य भी हैं।

एक कुशल वक्ता और समाजसेवी निशिकांत दुबे का विवाह 15 अप्रैल 2000 को अनामिका गौतम से हुआ था और वे दो पुत्रों के पिता हैं। उनकी खेलकूद और संगीत में अभिरुचि है तथा वे धार्मिक सत्संगों और प्रवचनों में भी जाना पसंद करते हैं। उन्होंने अमेरिका, युरोप और दक्षिण एशिया के कई देशों की यात्रा की है और वे एक बेहद जानकार राजनेता के तौर पर पहचाने जाते हैं। वे समाजसेवा व शिक्षै से जुड़े कई संस्थाओं के अध्यक्ष भी हैं। उनकी काबिलियत, शोहरत और सक्रियता से स्पष्ट है कि जल्दी ही वे राष्ट्र निर्माण में किसी बड़ी जिम्मेदारी के पद को शोभायमान करेंगे।

एशिया पोस्ट सर्वे – प्रभावशाली सांसद 2017 में सांसदों का जनता से जुड़ाव, प्रभाव, छवि, पहचान, कार्यशैली, सदन में उपस्थिति, बहस में हिस्सा, प्राइवेट बिल, सदन में प्रश्न, सांसद निधि का उपयोग व सामाजिक सहभागिता को मुख्य मापदंड बना कर किये गये सर्वे में निशिकांत दुबे को प्रमुख स्थान प्राप्त करने के लिये टीम फेम इंडिया की बधाई और शुभकामनाएं।

(सर्वे स्टेक होल्ड तरीके से लोगो से पूछे गये पॉंच सवाल और लोकसभा की साइट पर उपलब्ध चार प्रमुख डाटा ,कुल नौ बिंदुओं पर आधारित है)