संसद में एक मजबूत आवाज हैं सुप्रिया सुले (एशिया पोस्ट श्रेष्ठ सांसद सर्वे 2017)

महाराष्ट्र की मराठा राजनीति के असरदार राजनेता की राजनीतिक वारिस सुप्रिया सुले लोकसभा में एक सशक्त आवाज हैं। 16वीं लोकसभा में वे पुणे की बारामती सीट से एनसीपी की सांसद हैं। वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रेसिडेंट और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार की इकलौती बेटी है। उन्हें अपने पिता के योग्य उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जाता है। 2006 में पहली बार सुप्रिया राज्‍यसभा के लिये निर्वाचित हुईं। 2009 में हुए आम चुनावों में वे जीत कर 15वीं लोकसभा की सदस्य बनीं और 31 अगस्‍त 2009 को उन्‍हें विदेशी मामलों की समिति, ग्रामीण विकास समिति का सदस्‍य घोषित किया गया। 23 सितंबर 2009 को उन्‍हें महिला विकास समिति का सदस्‍य बनाया गया। और 7 अक्‍टूबर 2009 को उन्‍हें आचार समिति का सदस्‍य बनाया गया।

संसद में अपनी बातों को जोरदार ढंग से रखने वाली सुप्रिया अपनी कॉलेज लाइफ में बेहद शर्मीले स्वभाव की थीं। उन्होंने पुणे के संत कोलंबस स्कूल से 12वीं तक पढ़ाई की और उसके बाद यहीं के एक कॉलेज से माइक्रोबायोलॉजी में बीएससी किया। कॉलेज में पढ़ने के दौरान उनकी चार-पांच सहेलियां ही थीं। जब वे कॉलेज में थीं, तब उनके पिता शरद पवार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री थे लेकिन उन्होंने सुप्रिया को कठोर अनुशासन में रखा। मुख्यमंत्री की बेटी होने के बावजूद वे सरकारी बस से ही कॉलेज जाती थीं। उन्हें घर से रोज दस रुपए पॉकेट मनी मिलती थी। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुप्रिया पुणे में रहने लगी। इस दौरान उन्होंने पुणे के एक अखबार में पत्रकारिता भी की जहां एक फैमिली फ्रेंड के यहां सुप्रिया की मुलाकात अमेरिका में नौकरी करने वाले सदानंद सुले से हुई। वे बाला साहब ठाकरेके भांजे भी हैं। एक-दूसरे को पसंद करने की वजह से सुप्रिया और सदानंद की शादी हो गई। शादी के बाद वे कुछ समय कैलिफ़ोर्निया में रही और इसके बाद कुछ समय इंडोनेशिया और सिंगापुर में रहने के बाद सुप्रिया दोबारा मुंबई आकर बस गयीं।

सुप्रिया सुले 16वीं लोकसभा में बाहरी मामलों के स्थायी समिति की सदस्य भी हैं। वे 5 फरवरी 2015 को महिला सशक्तिकरण समिति की सदस्य भी बनीं। राजनीतिज्ञ होने के अलावे सुप्रिया सुले पवार पब्लिक चेरिटेबल ट्रस्‍ट की अध्‍यक्ष भी हैं और कई सामाजिक संस्‍थाओं जैसे एनएबी विमन काउंसिल, नेहरू सेंटर (मुंबई), वाईवी चव्‍हाण केंद्र (मुंबई) और इंडियन इंस्‍टीट्यूट ऑफ़ रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑन नोमेडिक एंड डि-नोटेड ट्राइब्‍स आदि संस्थाओं की सदस्‍य भी हैं।

इतनी सारी जिम्मदारियों को निभाते हुए भी सुप्रिया सुले की उपस्थिति लोकसभा में 95 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत से कहीं ऊपर है। उन्हें अब तक 16वीं लोकसभा में सबसे अधिक सवाल उठाने वाली सांसद होने का गौरव प्राप्त है। वे दो वर्षों में 788 सवाल पूछ चुकी हैं जो मेट्रो रेल, रेलवे के विस्तार, हाई स्पीड रेल कॉरीडोर, नॉर्थ ईस्ट में रेलवे के विस्तार, नैशनल डिजास्टर मैनेजमेंट फंड, म्यानमार को शस्त्र सप्लाई आदि विषयों से संबंधित हैं। दूसरी बार लोकसभा पहुंची सुप्रिया सुले ने इस बार बच्चों की मुफ्त शिक्षा, महाराष्ट्र के किसानों की कर्जमाफी, किसान आंदोलन के मुद्दे, बलात्कारियों को फांसी, दलितों पर अत्याचार आदि विषयों पर हुई 69 बहसों में हिस्सा लिया है। उन्होंने बाल सुरक्षा, बच्चों को मुफ्त सेकेंडरी व सीनीयर सेकेंडरी स्तर की शिक्षा, इंडियन पेनल कोड में सुधार, दो बच्चों के नॉर्म व उच्च शिक्षण संस्थानों के नियमन आदि से संबंधित एक दर्जन प्राइवेट बिलों को सदन में पेश किया है।

एशिया पोस्ट सर्वे – प्रभावशाली सांसद 2017 में सांसदों का जनता से जुड़ाव, प्रभाव, छवि, पहचान, कार्यशैली, सदन में उपस्थिति, बहस में हिस्सा, प्राइवेट बिल, सदन में प्रश्न, सांसद निधि का उपयोग व सामाजिक सहभागिता को मुख्य मापदंड बना कर किये गये सर्वे में सुप्रिया सुले को प्रमुख स्थान प्राप्त करने के लिये टीम फेम इंडिया की बधाई और शुभकामनाएं। (सर्वे स्टेक होल्ड तरीके से लोगों से पूछे गये पॉंच सवाल और लोकसभा की साइट पर उपलब्ध चार प्रमुख डाटा, कुल नौ बिंदुओं पर आधारित है।)