सदन के सबसे सक्रिय सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा (एशिया पोस्ट श्रेष्ठ सांसद सर्वे 2017)

उत्तर प्रदेश के सबसे पिछड़े इलाकों में से एक बांदा के सांसद भैरों प्रसाद मिश्रा करीब 60 साल की उम्र में पहली बार 2014 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर संसद पहुंचे थे तो उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें इस लोकतंत्र के इस मंदिर में एक ऐसा पुजारी बन कर दिखाना है, लोग जिसकी मिसाल दे सकें। उन्होंने ऐसा कर दिखाया महज तोन वर्षों में जब पीआरएस ने उन्हें संसदीय आंकड़ों के आधार पर देश का सबसे सक्रिय सांसद घोषित किया तो तीन वर्षों तक सदन में शत प्रतिशत उपस्थिति के साथ-साथ उन्होंने 1506 बहसों में भी बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है। इसके अलावा उन्होंने संसद में 384 प्रश्न उठाये हैं और 9 प्राइवेट मेंबर बिलों को पेश किया है।

इलाहाबाद के जमुना क्रिश्चियन कॉलेज से महज इंटरमीडिएट तक पढ़ने के बाद भैरों प्रसाद मिश्रा देश में लगे इमरजेंसी के दौर में राजनीति में कूद पड़े थे। युवा भैरों हालांकि उस समय राजनीति को पूरी तरह समझते भी नहीं थे, लेकिन उन्होंने तभी तय कर लिया था कि लोगों की सेवा को ही वे अपने जीवन का उद्देश्य बनायेंगे। एक अरसे तक बिना किसी पद के लोकसेवा से जुड़े रहे भैरों प्रसाद ने 90 के दशक की शुरुआत में स्थानीय कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने तो प्रशासनिक पदों की शुरुआत हो गयी। 1991-92 में बांदा के जिला कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष बने भैरों प्रसाद मिश्रा को 1993 में ही विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका मिला और उन्होंने जोरदार जीत हासिल की। हालांकि यह विधानसभा 1995 में ही भंग हो गयी और इसके बाद मची राजनीतिक उथल-पुथल में भाजपा की स्थिति अच्छी नहीं रही। भैरों प्रसाद मिश्रा को भी लंबे संघर्ष के बाद 2014 में संसदीय चुनाव में भाजपा का प्रत्याशी बनने का मौका मिला तो इलाके के मतदाताओं ने पूरा साथ दिया।

चुनाव जीतने को भैरों प्रसाद मिश्रा ने एक लक्ष्य नहीं बल्कि एक जरिया बनाया। वे लोकसभा के सबसे कर्मठ और जुझारू सदस्यों में से माने जाते हैं। खुद उनका कहना है कि इलाके की जनता ने अगर उनमें भरोसा जताया है तो विकास कार्यों और लोगों के जीवन के सरल बनाना उनकी जिम्मेदारी है। वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य हैं और ग्रामीण विकास व स्वच्छता मंत्रालयों की सलाहकार समिति के सदस्य भी हैं।

खेलकूद और भ्रमण के शौकीन भैरों प्रसाद मिश्रा ने देश के लगभग सभी प्रमुख पर्यटन स्थलों का दौरा कर चुके हैं औऱ कई स्थानीय खेल क्लबों के संरक्षक व अध्यक्ष भी हैं। हालांकि 2008-09 में उन्हें बुंदेलखंड डेवलपमेंट बोर्ड का उपाध्यक्ष बनने का भी मौका मिला, लेकिन उसके बाद किसी बड़े पद पर आसीन नहीं रहे और सीधा संसद ही पहुंच कर दम लिया जहां वे समर्पित भाव से सेवा में जुट गये। वे कई सामाजिक समितियों के संरक्षक व पदाधिकारी भी हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और समाज के दबे-कुचले व शोषितों की सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य मानने वाले भैरों प्रसाद मिश्रा को कट्टर समाजसेवी और जनता से जुड़ा राजनेता माना जाता है। हालांकि उन्हें भाजपा ने राष्ट्रीय राजनीति में कोई महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौंपी है, लेकिन संसदीय कार्यप्रणाली में उनकी निष्ठा और लगन को देखते हुए ऐसा लगता है कि वे जिस मुकाम पर हैं उनमें उससे बहुत आगे जाने की क्षमता है।

एशिया पोस्ट सर्वे – प्रभावशाली सांसद 2017 में सांसदों का जनता से जुड़ाव, प्रभाव, छवि, पहचान, कार्यशैली, सदन में उपस्थिति, बहस में हिस्सा, प्राइवेट बिल, सदन में प्रश्न, सांसद निधि का उपयोग व सामाजिक सहभागिता को मुख्य मापदंड बना कर किये गये सर्वे में भैरो प्रसाद मिश्रा को प्रमुख स्थान प्राप्त करने के लिये टीम फेम इंडिया की बधाई और शुभकामनाएं।
(सर्वे स्टेक होल्ड तरीके से लोगो से पूछे गये पॉंच सवाल और लोकसभा की साइट पर उपलब्ध चार प्रमुख डाटा ,कुल नौ बिंदुओं पर आधारित है)