जन सरोकार की मजबूत आवाज हैं एन के प्रेमचंद्रन (एशिया पोस्ट श्रेष्ठ सांसद सर्वे 2017)

केरल से रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट लोकसेवक रहे एन के प्रेमचंद्रन संसद में और संसद के बाहर भी आम लोगों के हितों के लिए खूब संघर्ष किया। संसद में वह विभिन्न मुद्दों पर अपनी बेबाक राय के लिए खास तौर पर पहचान बना चुके हैं। कई ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा करके उन्होंने इसे साबित भी किया है। प्रेमचंद्रन की खासियत है कि संसद में उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों की काट उनके अपने विरोधियों के पास भी नहीं होती। विषयों पर उनकी पकड़ और शोध इतने मजबूत होती है कि विरोधियों की न केवल बोलती तो बंद होती ही है बल्कि उन्हें उनका समर्थन भी करना पड़ता है। चाहे वह ट्रांस्जेंडर्स के लिए कानून बनाने का मुद्दा हो या पत्रकारों के लिए नया वेतन आयोग गठित करने की मांग और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे प्रेमचंद्रन आम लोगों की परेशानियां हल करने के लिए हमेशा प्रयास करते नजर आते हैं।
प्रेमचंद्रन रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के सदस्य हैं और लोकसभा में पार्टी के एकमात्र सांसद। राजनीति से उनका जुड़ाव छात्र जीवन में ही हो गया। पढ़ाई करते हुए उन्होंने प्रोग्रेसिव स्टूडेंट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष और फिर रिवॉल्यूशनरी यूथ फ्रंट की राज्य समिति में महासचिव के रूप में जिम्मेदारी निभायी। जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी शुरूआत उनके ग्रह क्षेत्र निवाकुलम से हुई जब 1987 में उन्हें ग्राम पंचायत का सदस्य चुना गया। 1991 से 1993 तक उन्होंने तिरुअनंतपुरम जिला परिषद के रुप में काम किया। उनकी मेहनत और दूरदर्शी दृष्टिकोष के चलते वह लोगों के चहीते बन गए और 1996 तथा 1998 में उन्हें कोल्लम लोकसभा से सांसद चुना गया. दो बार लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद 2000 में उन्होंने राज्यसभा चुनाव जीता और 2006 तक संसद के उच्च सदन के सदस्य रहे। 2006 से 2011 तक उन्होंने केरल में जल संसाधन मंत्री की जिम्मेदारी निभायी। इस पद पर रहते हुए उन्होंने कई ऐसे काम किये जिनके लिए
विभाग में आज भी उनकी खास पहचान है।
पेशे से वकील रहे प्रेमचंद्रन का जन्म 25 मई 1960 को तुरुअनंतपुरम जिले के निवाकुलम में हुआ। उन्होंने कोल्लम के फातिमा माता राष्ट्रीय कॉलेज से पहले बीएससी की पढ़ाई की और फिर 1985 में कानून में स्नातक की डिग्री हासिल की। उन्होने अपने बैच में केरल विश्वविद्यालय में पहली रैंक हासिल की। बतौर सांसद सदन में उनकी उपस्थिति राष्ट्रीय औसत 81 प्रतिशत से कहीं अधिक 86 प्रतिशत है जबकि उन्होंने संसद के 212 बहसों में हिस्सा लिया है। उन्होंने करीब 360 महत्त्वपूर्ण प्रश्न उठाये हैं जिनके जवाब खोजने में सरकार को कई बार खासी मशक्कत करनी पड़ी है।
सिनेमा और घूमने के शौकीन प्रेमचंद्रन लगभग आधी दुनिया देख चुके हैं। उन्होंने अमेरिका, रूस,  वियतनाम, ब्रिटेन, ईराक, यूएई, हाॉंगकॉंग, फिलिपींस, क्यूबा, थाइलैंड, सीरिया, ट्रिनिडाड व टोबैगो, मलेशिया, बहरीन और ओमान आदि देशों की यात्राएं की हैं। नोटबंदी के मुद्दे पर संसद में सरकार को घेरने में जो नेता सबसे आगे रहे उनकी पहली कतार में रिवॉल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के सांसद एन के प्रेमचंद्रन का नाम अग्रणी है। नोटबंदी पर संसद में हुई चर्चा में भाग नहीं लेने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री तक को नहीं बख्शा। उन्होंने इसे संसद का अपमान करार दिया और नोटबंदी के मुद्दे पर वोटिंग की मांग की।
नरेन्द्र मोदी एप्प पर सर्वेक्षण में 93 प्रतिशत लोगों द्वारा नोटबंदी का समर्थन करने के सरकार के सरकार के दावे पर तीखा प्रहार करते हुए कोल्लम के इस सांसद ने कहा कि वह एक एप्प सर्वेक्षण का दावा कर रहे हैं जबकि हमारा मानना है कि इसका सही मंच संसद है जहां मतविभाजन के जरिये यह साफ हो जायेगा कि नोटबंदी को कितना समर्थन प्राप्त है और कौन कौन लोग इसके पक्ष में हैं। उनके इस सवाल को लगभग सभी पार्टियों के सांसदों ने औचित्यपूर्ण और सदन की गरिमा बढ़ाने वाला माना।
एशिया पोस्ट सर्वे – प्रभावशाली सांसद 2017 में सांसदों का जनता से जुड़ाव, प्रभाव, छवि, पहचान, कार्यशैली, सदन में उपस्थिति, बहस में हिस्सा, प्राइवेट बिल, सदन में प्रश्न, सांसद निधि का उपयोग व सामाजिक सहभागिता को मुख्य मापदंड बना कर किये गये सर्वे में एनके प्रेमचंद्रन को प्रमुख स्थान प्राप्त करने के लिये टीम फेम इंडिया की बधाई और शुभकामनाएं।