मजबूत इरादे और पक्के विश्वास के धनी हैं ओम बिड़ला (एशिया पोस्ट श्रेष्ठ सांसद सर्वे 2017)

राजस्थान की शिक्षा नगरी कहे जाने वाले शहर कोटा के सांसद ओम बिरला की पहचान एक ऐसे राजनेता की है जो न सिर्फ अपने क्षेत्र के, बल्कि पूरे प्रदेश को शिक्षा के शिखर पर लाने की मुहिम में जुटे हैं। ओम बिरला का जन्म 4 दिसंबर 1962 को राजस्थान के कोटा में हुआ उन्होंने महार्षि दयानंद सरस्वती अजमेर विश्विद्यालय के गवर्मेंट कॉमर्स कॉलेज से एमकॉम की पढाई की। छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे बिरला 1979 में छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। वह भाजपा के छात्र संगठन भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष  और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी रहे। बिरला राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के भी सदस्य रहे हैं। सांसद बनने से पहले बिरला कोटा दक्षिण क्षेत्र से तीन बार विधायक भी चुने जा चुके हैं। उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव 2003 में जीता। कांग्रेस के शांती धारीवाल को 10,101 मतों के अंतर से पराजित किया। इसके बाद 2008 में कांग्रेस से अपने निकटतम उम्मीदवार राम किशन वर्मा को 24,300 मतों के अंतर से और 2013 में उन्होंने कांग्रेस के पंकज मेहता 50,000 मतों से मात दी। 2003 से 2008 तक उन्होंने राजस्थान सरकार में राज्यमंत्री रहते हुए संसदीय सचिव की जिम्मेदारी संभाली।
ओम बिरला पहली बार लोकसभा में जनता का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। 54 वर्षीय ओम बिरला की लोकसभा में उपस्थिति 86 प्रतिशत दर्ज की गयी है। उन्होंने सरकारी समझौता एक्सप्रेस विस्फोट की जांच में सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, ओबीसी छात्रों को छात्रवृत्ति, ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले को भारत रत्न, बांग्लादेश से घुसपैठ, चित्तौड़गढ़ के किसानों को क्षतिपूर्ति, जलवायु परिवर्तन, डेंगू और चिकनगुनिया, एयरफोर्स और नौसेना में भर्ती, मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक, बीएसएफ के जवानों को पेंशन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन को बढ़ाने, किसानों के लिए सब्सिडी और कर्ज माफी, दिल्ली सरकार द्वारा सार्वजनिक धन दुरुपयोग, औद्योगिक अपशिष्ट से नदियों में प्रदूषण, बीपीएल परिवारों की नयी सूची बनाने, गैर संगठित क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के बच्चों के लिए क्रेच, टीबी की रोकथाम, राजस्थान के किसानों की फसल के समर्थन मूल्य, जंगली जानवरों से फसलों की रक्षा और चंबल नदी से सिंचाई जैसे मुद्दों पर 136 विशेष उल्लेख और चर्चाओं में हिस्सा लिया है। वे वाणिज्य और उद्योग, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम, रक्षा, नागर विमानन, विदेशी, गृह मंत्रालय,जनजातीय मामलों, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, वित्त, जल संसाधन, अल्पसंख्यक मामलों, रेलवे, कृषि और किसान कल्याण, संस्कृति, मानव संसाधन विकास, कानून और न्याय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, ग्रामीण विकास, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, महिला बाल विकास, सूचना और प्रसारण, पेयजल और स्वच्छता, सड़क परिवहन और राजमार्ग और ग्रामीण विकास मंत्रालय से कुल 532 सवाल पूछ चुके हैं। बिरला ने स्कूलों में स्वच्छता की अनिवार्य शिक्षा और गवाहों की सुरक्षा समेत कुल तीन प्राइवेट मेंम्बर बिल पेश किए हैं। बिरला संसद में ऊर्जा पर स्थायी समिति के सदस्य हैं। वे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के लिए याचिकाओं और सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे हैं।
गरीबों, असहाय, गंभीर रोगियों और बेसहारा महिलाओं की मदद के लिये ओम बिरला हमेशा तैयार रहते हैं। उन्होंने संसदीय सचिव रहते हुए राजस्थान के बाढ़ पीड़ितों के लिए विशेष राहत और बचाव कार्यों का संचालन किया। विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से वे विकलांगों, कैंसर रोगियों और थैलेसीमिया रोगियों की मदद करते हैं। विकलांगों को मुफ्त ट्राई साइकिल्स, व्हीलचेयर और श्रवण यंत्र उपलब्ध कराने के लिये भी वह प्रयास करते हैं। पर्यारवण संरक्षण में भी उनकी विशेष रुचि है। उन्होंने ग्रीन कोटा अभियान की शुरूआत की जिसके तहत एक लाख पेड़ लगाये गये हैं। नेहरू युवा केंद्र के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन कराकर कई प्रतिभाशाली युवकों को आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराया। इसके अतिरिक्त वह आदिवासियों के लिए वह बेरोजगारी और कुपोषण से मुक्ति के लिये भी अभियान चलाते हैं। जनवरी, 2001 को गुजरात में भूकंप का शिकार हुए लोगों को भी उन्होंने विशेष सहायता समूह बनाकर चिकित्सा सेवाएं दीं। वह जरूरतमंदों को मुफ्त भोजन के लिए प्रसाद और निशुल्क उपचार के लिए मेडिसिन बैंक का भी संचालन करते हैं।
राम मंदिर निर्माण आंदोलन में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। उन्हें उत्तरप्रदेश मे गिरफ्तार भी किया गया। जयपुर और सवाई माधोपुर में सीमेंट फैक्ट्री शुरू करने के लिये आंदोलन में भी वह शामिल हुए जिसके कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा। युवाओं में राष्ट्रीयता की भावना जगाने और शहीदों के सम्मान के लिए उन्होंने ‘आजादी के स्वर’ कार्यक्रम की शुरूआत की। यह कार्यक्रम 2006 से हर वर्ष स्वाधीनता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित किया जाता है। उन्होंने कोटा शहर में आईआईटी स्थापित करने के लिए भी आंदोलन का नेतृत्व किया। इसके अतिरिक्त बिरला ने चंबल नदी से पानी की आपूर्ति और सिटी डेवलपमेंट टैक्स तथा बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विरोध में भी आंदोलन चलाया।
एशिया पोस्ट सर्वे – प्रभावशाली सांसद 2017 में सांसदों का जनता से जुड़ाव, प्रभाव, छवि, पहचान, कार्यशैली, सदन में उपस्थिति, बहस में हिस्सा, प्राइवेट बिल, सदन में प्रश्न, सांसद निधि का उपयोग व सामाजिक सहभागिता को मुख्य मापदंड बना कर किये गये सर्वे में ओम बिरला को प्रमुख स्थान प्राप्त करने के लिये टीम फेम इंडिया की बधाई और शुभकामनाएं। (सर्वे स्टेक होल्ड तरीके से लोगों से पूछे गये पॉंच सवाल और लोकसभा की साइट पर उपलब्ध चार प्रमुख डाटा, कुल नौ बिंदुओं पर आधारित है।)