क्षेत्रीय विकास को लेकर बेहद जज्बाती हैं अरविंद सावंत (एशिया पोस्ट श्रेष्ठ सांसद सर्वे 2017)

शिवसेना नेता अरविंद सावंत लोकसभा में दक्षिण मुम्बई सीट की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं। वह भले ही पहली बार सांसद चुने गए हैं लेकिन राजनीति से उनका पुराना नाता है। 65 वर्षीय सावंत लबे समय से महानगर दूरसंचार निगम लिमिटेड कर्मचारियों की ट्रेड के प्रमुख रहे हैं। शिव सेना से उनका नाता 1966 से है। सावंत इससे पहले दो बार महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य भी रह चुके हैं। 2010 में महाराष्ट्र विधानसभा में उन्होंने शिवसेना के उपनेता सदन की ज़िम्मेदारी निभायी।

स्पष्ट-भाषी सावंत की मराठी के साथ साथ हिंदी और अंग्रेज़ी पर भी मजबूत पकड़ है। लोकसभा चुनाव में उनका मुकाबला तत्कालीन केंद्रीय मंत्री मिलिंद देवड़ा और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के बाला नंदगांवकर से था। चुनाव में क्षेत्र का संतुलित विकास और स्लम डेवलपमेंट उनके मुख्य मुद्दे रहे। सावंत मानते हैं कि इससे मुम्बई में विकास कार्यों के लिए की एकर भूमि उपलब्ध हो सकेगी। सावंत के मानना है कि हर वर्ष कारों के रूप में मुंबई 75000 करोड़ रुपये का राजस्व केंद्र सरकार को देती है लेकिन बदले में उसे जो मिलता है वह बहुत कम है। वह वर्ली सी लिंक को नरीमन पॉइंट तक विस्तार के पक्ष में हैं।

सावंत को 2014 में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की स्थायी समिति के सदस्य नियुक्त किया गया। लोकसभा में उनकी उपस्तिथि 98 प्रतिशत है। बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा, जलवायु परिवर्तन, मोटर व्हीकल एक्ट, किसानों की समस्याएं, कर्जमाफी, गुटका सिगरेट पर प्रतिबंध, शत्रु सम्पत्ति, डाकघरों में नियुक्तियों में भ्रष्टाचार तथा जनता से जुड़े कई अन्य मुद्दों पर विशेष उल्लेख सहित 213 चर्चाओं में शामिल हो चुके हैं। विमुद्रीकरण, नर्सिंग कॉलेज, जबकि नकली नोट, स्वास्थ्य, उपभोक्ता संरक्षण, ऊर्जा, पेट्रोलियम, कंपनी मामले, रोजगार, कर्मचारी समस्या, कानून और न्याय व्यवस्था, सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, सरकारी योजनाओं तथा कई दूसरे विषयों पर कुल सवाल 323 सवाल पूछ चुके हैं। सरकार द्वारा प्रायोजित आतंकवाद पर उन्होंने एकमात्र प्राइवेट मेंबर बिल पेश किया है। माओवादी गतिविधियों पेर सख्ती से नियंत्रण के पक्ष में है और संसद में इसे पुरज़ोर तरीके से उठा भी चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने उत्तर पूर्व की समस्याओं और सीमा पार चीनी गतिविधियों का मुद्दा भी लोकसभा में उठाया है।

मजदूर नेता के तौर पर सावंत ने एमटीएनएल के 60 हज़ार कर्मचारियों के मेहनताने और पेंशन को लेकर लंबा संघर्ष किया। सावंत की कोशिशें रंग लाई और सरकार को कर्मचारियों को उनका हक देना पड़ा।

31 दिसंबर 1951 को जन्मे सावंत ने बीएससी की पढ़ाई की। महाराष्ट्र विधानसभा में दिए भाषणों को वह किताब के रूप में प्रकाशित कर चुके हैं। वह रक्तदान शिविर आयोजित करते रहे हैं और फ़ायन तूफान पीड़ितों के लिए भी उन्होंने विशेष इंतज़ाम किये। सावंत आदिवासी बच्चों के पौष्टिक भोजन और कपड़ों की व्यवस्था करते रहे हैं। आपदा के समय उन्होंने महाराष्ट्र और अन्य जगहों पर कई राहत दलों का नेतृत्व भी किया है।

पढ़ने और संगीत में उनकी विशेष रुचि है। वह पुराने मराठी और हिंदी गीतों के मुरीद है। खाली समय में वह समसरि तटों और पहाड़ों की यात्रा करना पसंद करते हैं। क्रिकेट, कबड्डी, खो खो, कर्म उनके पसंदीदा खेल है। उन्होंने चीन, इंग्लैंड, बेल्जियम, फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, मलेशिया और थाईलैंड का दौर भी किया है।