युवा राजनीति में मजबूती से उभरते इं. संतोष रंजन राय

स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपने जीवन का दर्शन मानने वाले युवा राजनेता इं. संतोष रंजन राय की चर्चा भारतीय जनता पार्टी में देश भर से तेजी से उभर रही युवा टीम के मुख्य सदस्य के तौर पर की जाती है। करीब 40 वर्षीय संतोष रंजन की राजनीति का सफर छात्र राजनीति से वर्ष 1992 में शुरु हुआ।

बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव के चलते ये कॉलेज की शिक्षा के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के सदस्य बने। मुखर संतोष रंजन ने अपने जुझारू स्वभाव के चलते वर्ष 1996 में प्रदेश की युवा राजनीति में बहुत जल्दी ही अपनी पहचान कायम कर ली। हालांकि संतोष रंजन राजनीति में अपना मुकाम बनाते जा रहे थे, लेकिन इनका पारिवारिक परिवेश पढ़ाई-लिखाई से जुड़ा था। पिता इंजीनियर थे और उनकी ख्वाहिश अपने पुत्र संतोष को आईएएस अधिकारी बनाने की थी, परन्तु आरएसएस के स्वयंसेवक के तौर पर बचपन से ही रोज शाखा जाने और विवेकानंद के विचारों से प्रभावित होने की वजह से उनकी रुचि राष्ट्र सेवा और राजनीति में हो गयी।

प्रारंभिक शिक्षा पूरी कर जब ये कॉलेज की राजनीति से जुड़ गये।युवा राजनीति और पढ़ाई साथ-साथ करते हुए इन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और नौकरी करने की जगह इन्होंने कुछ मित्रों के साथ रेडिमेड गारमेंट का स्टार्ट अप बिजनेस शुरु किया। आरएसएस की कार्यशाला में सीखे संगठन की शक्ति के मंत्र से इनका स्टार्ट-अप बहुत तेजी से बढ़ निकला और इनकी पहचान एक सफल इंटरप्रेन्योर की बनी।

मित्रों और सहयोगियों का सहयोग व्यापार में मिलते रहने की वजह से संतोष रंजन सक्रिय तौर पर युवा राजनीति में भागीदारी निभाने लगे और विरासत की राजनीति से इतर इं. संतोष रंजन ने अपनी राजनीतिक पहचान कायम की। सरल स्वभाव और समर्पित कर्मठ कार्य करने की वजह से इन्हें प्रदेश की भाजपा युवा मोर्चा की टीम में प्रमुख स्थान दिया गया। यहां इनकी क्षमता को भाजयुमो के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रखर युवा राजनेता धर्मेंद्र प्रधान ने पहचाना और कई प्रमुख कार्यक्रमों की जिम्मेवारी इन्हें दी।

संतोष रंजन ने संगठन में काफी गंभीरता से कार्य किया। पार्टी में साधारण कार्यकर्ता से लेकर बड़े नेताओं तक एक कुशल नेतृत्व कर्ता के रुप में इनकी पहचान बनी। इन्हें भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य और चुनावी वर्ष में युवा मोर्चा का झारखंड प्रभारी भी बनाया गया। इसी दौरान संतोष रंजन की निकटता बिहार की राजनीति में दादा नाम से प्रसिद्ध और राष्ट्रीय राजनीति के मजबूत हस्ताक्षर वरिष्ठ भाजपा नेता गिरिराज सिंह से हुई। इन्हें वस्तुतः केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के रुप मे एक बड़े मार्गदर्शक मिले यहां से इनके राजनीतिक सफर को राष्ट्रीय उड़ान मिली।

वर्तमान में भाजपा की बिहार प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य संतोष रंजन राय कुछ ऐसे गिने-चुने युवा नेताओं में से हैं जिन्हें सुलझी हुई रणनीति बनाने और टाइम मैनेजमेंट में कुशल माना जाता है। फेम इंडिया ने देश की युवा राजनीति के उभर रहे सितारों में संतोष रंजन को मुख्य स्थान पर पाया है।