भारतीय मीडिया के युग प्रवर्तक हैं डॉ. सुभाष चंद्रा (फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017)

अगर भारत में सैटेलाइट टीवी की शुरुआत स्टार टीवी नेटवर्क से मानी जा सकती है तो यह भी जोड़ना जरूरी होगा कि इसे पंख मिले पहले निजी चैनल ज़ी टीवी के बाद ही। अपनी तरह के पहले इस चैनल की बुनियाद रखने के बारे में जिस शख्सियत ने सोचा और इसकी पहल की वे एक ऐसे व्यापारी थे जिनका मीडिया से दूर-दूर तक कोई वास्ता न था। वो कोई और नहीं बल्कि सुभाष चंद्रा हैं जिन्हें आज भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का जनक कहा जाता है।

हरियाणा के हिसार जिले में 30 नवंबर 1950 को जन्मे सुभाष को बचपन से ही स्कूली पढ़ाई में कोई खास रुचि नहीं थी। 12 वीं तक पढ़ने के बाद ही उन्होंने बिना परीक्षा दिये पढ़ाई छोड़ दी। उन्हें शुरू से ही अपना व्यवसाय स्थापित करने का धुन सवार था। खुद के व्यवसाय का ऐसा नशा था कि मात्र 19 साल की उम्र में उन्होंने वेजिटेबल ऑयल बनाने की यूनिट लगा कर कारोबार शुरू किया। इसके बाद वो चावल के व्यापार में उतरे और फिर अनाज एक्सपोर्ट के व्यापार में लग गये। हमेशा कुछ नया करने के शौकीन रहे सुभाष चंद्रा को वर्ष 1981 में एक पैकेजिंग एग्जिविशन के दौरान पैकेजिंग के व्यवसाय में उतरने का आइडिया मिला और फिर क्या था उन्होंने एस्सेल पैकेजिंग के नाम से जो कंपनी बनायी वो देश की अग्रणी पैकेजिंग कंपनी बनी।

इसके बाद 2 अक्टूबर,1992 को वे अपने जीवन के सबसे सफल – ब्रॉडकास्टिंग के बिजनेस में उतरे। उन्होंने स्टार नेटवर्क के तत्कालीन मालिक ली का-शिंग के साथ अनुबंध कर ज़ी टीवी के नाम से भारत का पहला प्राइवेट सेटेलाइट चैनल शुरू किया। इसके कुछ ही महीने बाद जब रुपर्ट मर्डोक ने स्टार का अधिग्रहण कर लिया तो सुभाष चंद्रा ने उनके साथ भी अनुबंध कर लिया। वर्ष 1994 में जमीन पर केबल व्यापार के लिये मर्डोक के साथ मिल कर ‘सिटीकेबल’ शुरू किया जो एक चैनल भी था। 1995 में दो और हिंदी चैनल – ज़ी सिनेमा और एल टीवी (बाद में ज़ी न्यूज़ में परिवर्तित) की शुरुआत की। वर्ष 2000 में ज़ी नेटवर्क केबल के माध्यम से इंटरनेट कनेक्शन देने वाली पहला ग्रुप बन गया। वर्ष 2003 में सुभाष चंद्रा सैटेलाइट के माध्यम से ‘डायरेक्ट टू होम’ यानी डीटीएच सेवा देने वाले पहले ब्रॉडकास्टर बन गये। आज उनका नेटवर्क लगभग 70 चैनलों के मध्यम से दुनिया के 167 देशों के कुल 73 करोड़ दर्शकों तक पहुँचता है।

बाद के वर्षों में सुभाष चंद्रा ने मीडिया के कई व्यवसायों में हाथ आजमाया और तकरीबन हर वेंचर में सफल साबित हुए। उन्होंने एस्सेल श्याम के नाम से अपलिंकिंग का कारोबार शुरु किया। कुछ साल पहले उन्होंने भाष्कर ग्रुप के साथ मिलकर डीएनए अखबारों की श्रृंखला भी शुरु की जो बेहद लोकप्रिय हुआ। इन सबके अलावे उनके कई अन्य मीडिया वेंचर हैं – केबल सिस्टम (वायर एंड वायरलेस लिमिटेड), डायरेक्ट-टू-होम (डिश टीवी), उपग्रह संचार (अग्रणी एंड प्रोकॉल) आदि। उन्होंने मीडिया के समानांतर थीम पार्क (एस्सेल वर्ल्ड और वाटर किंगडम), ऑनलाइन गेमिंग (प्लेविन), शिक्षा (ज़ी लर्न), फ्लेक्सिबल पैकेजिंग (एस्सेल प्रोपैक), बुनियादी ढांचे के विकास (एस्सेल इन्फ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड) और परिवार के मनोरंजन केंद्र (फन सिनेमाज) जैसे वेंचरों को भी खड़ा किया।

आज सुभाष चंद्रा देश के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक हैं, लेकिन समाज के लिये भी बहुत कार्य करते हैं। वे मल्टीमीडिया तालीम (ट्रांसनैशनल अल्टेरनेट लर्निंग फॉर एमैन्सिपेसन एंड एम्पावरमेंट थ्रू मल्टीमीडिया) के संस्थापक हैं और ओपन लर्निंग के जरिये अच्छी शिक्षा उपलब्ध कराते हैं। वे ग्लोब विपश्यना फाउंडेशन के भी प्रेसिडेंट भी हैं व भारत में एकल विद्यालय फाउंडेशन के चेयरमैन भी हैं। इसके माध्यम से लगभग 40000 गावों के 11 लाख से भी ज्यादा आदिवासी छात्रों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। वे अंतरराष्ट्रीय फाउंडेशन सिविलाइज्ड हारमोनी के भी संस्थापक चेयरमैन हैं।

उन्हें एक बेहतरीन ब्रॉडकास्टर होने के साथ-साथ सफल उद्योगपति व समाजसेवी होने के कारण कई दर्जन ईनाम व पुरस्कार मिल चुके हैं। उन्हें युनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट लंदन ने बिजनेस ऐडमिनिस्ट्रेशन में मानद पीएचडी की उपाधि भी दी है। हाल ही में वे एक स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर राज्य सभा सांसद चुने गये हैं। फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017 में  डॉ. सुभाष चंद्रा को भारतीय टीवी मीडिया के एक प्रमुख सरताज के तौर पर पाया गया है