भारत के पहले सेल्फ मेड ‘मीडिया मुग़ल’ हैं राघव बहल (फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017)

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जगत में शायद ही कोई ऐसा होगा जो नेटवर्क 18 को नहीं जानता होगा। 4000 करोड़ से भी अधिक रकम में हुआ इसका अधिग्रहण देश के सबसे बड़े मीडिया सौदे के तौर पर जाना गया और फायदे में रहे इसे अपने गाढ़े पसीने की कमाई से खड़ा करने वाले राघव बहल। दुनिया भर के चैनलों के साथ हाथ मिला कर भारत में मीडिया के सबसे बड़े साम्राज्यों में से एक बने इस ग्रुप को बनाने वाले राघव बहल ने कुछ ही महीनों पहले मीडिया का एक नया वेंचर क्विन्टिलोन शुरु किया है जो द क्विन्ट के जरिये तेजी से लोकप्रिय होता जा रहा है। वे अपनी तरह के पहले ऐसे मीडिया बैरन हैं जिसने अपनी प्रोफेशनल जिंदगी में से बड़ा वक्त नौकरीपेशा पत्रकार के तौर पर बिताया और जीरो से कारोबार शुरु कर कम समय में ही अरबों तक पहुंचा दिया।

राघव बहल के पिता राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी थे, लेकिन उनकी पढ़ाई दिल्ली में ही हुई। सेट ज़ेवियर्स से स्कूलिंग कर प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस से ग्रैजुएशन करने वाले राघव बहल ने दिल्ली युनिवर्सिटी के फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ से एमबीए की डिग्री हासिल की है। कॅरीयर की शुरुआत की ए एफ फर्गुसन कंपनी में कंसल्टेंट के तौर पर, लेकिन जल्दी ही अमेरिकन एक्सप्रेस बैंक में नौकरी मिल गयी। ये मीडिया के प्रति उनका आकर्षण ही था कि इतने प्रतिष्ठित संस्थान से एमबीए करने के बावजूद 1980 के दशक के शुरुआत में जब दूरदर्शन में मौका मिला तो बतौर कॉरेस्पॉन्डेंट ज्वाइन कर लिया। कुछ ही दिनों में इंडिया टुडे ग्रुप के वीडियो मैगजीन ‘न्यूज़ट्रैक’ से जुड़े और ऐंकरिंग करने लगे। 1991 में वे बिजनेस इंडिया ग्रुप से जुड़े और काफी मेहनत से ‘बिजनेस इंडिया शो’ के नाम से न्यूज मैगजीन बनाया। दुर्भाग्य से उन्हीं दिनों राजीव गांधी की हत्या हो गयी और शो लॉंच नहीं हो पाया। जब तक मामला ठंढा हुआ तबतक खाड़ी युद्ध शुरु हो गया था और न्यूज मैगजीन का युग खत्म होकर सैटेलाइट टीवी का जमाना आ गया था।

इस बीच राघव बहल ने टीवी-18 के नाम से एक प्रोडक्शन हाउस भी बना लिया था जो मीडिया के टॉप सर्किल में काफी चर्चित था। राघव बहल ने भारी निवेश कर दो पायलेट बनवाये। एक बीबसी को भेजा और एक स्टार टीवी के ली कॉशिंग को। उनके काम का स्तर इतना उम्दा था कि बीबीसी ने अपने चैनल के लिये इंडिया बिजनेस रिपोर्ट नाम से एक शो बनाने के लिये उन्हें साइन कर लिया। स्टार ने भी उनके साथ काम करने की इच्छा जतायी, लेकिन तबतक उसका मर्डोक के हाथों अधिग्रहण हो गया।

1993 में बिजनेस इंडिया ने जब अपना चैनल टीवीआई शुरु करने की तैयारी की तो उन्होंने राघव बहल को बतौर एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर ज्वाइन करवाया। जब चैनल ऑन एयर होने को हुआ तो प्रबंधकों ने इसे रशियन सैटेलाइट से बीम कर टेलीकास्ट खर्च बचाया, लेकिन केबल ऑपरेटर उस सैटेलाइट को अपनाने के लिये तैयार नहीं हुए। राघव बहल उन चुनिंदा लोगों में से थे जिन्होंने इससे असहमति जतायी और कहा कि चैनल पर प्रोग्राम कितने भी बढ़िया हों, अगर दर्शकों तक नहीं पहुंच रहे तो बेकार हैं। उन्होंने दूरदर्शन के लिये बिजनेस एएम नाम से प्रोग्राम भी बनाया।

2004 में राघव बहल ने बिजनेस इंडिया छोड़ा तो उनके साथ कई लोग चले गये। उन्होंने टीवी18 को विस्तार देते हुए नेटवर्क18 का गठन किया। कम रिसोर्सेज में ज्यादा काम कैसे किया जा सकता है इसकी मिसाल राघव बहल ने ही खड़ी की। शुरुआत सीएनबीसी से की और एक-एक कर विदेश के बेहतरीन मीडिया ब्रैंड्स के साथ गठजोड़ कर भारतीय दर्शकों को नयी नयी जानकारियों वाले चैनल पेश किये। सीएनबीसी, सीएनएन, बीबीसी, वॉयाकॉम, स्टार, टाइम वॉर्नर व फोर्ब्स कुछ ऐसे चोटी के नाम हैं जिनके साथ नेटवर्क 18 का गठबंधन वर्षों तक कामयाब रहा।

व्यापार से लेकर फिल्म, मनोरंजन, बच्चों के लिये कार्टून, शॉपिंग व इतिहास और जानकारियों से भरे 35 बहुभाषी चैनलों के कारण राघव बहल को एक बड़े ब्रॉडकास्टर का तमगा मिल गया। उनके वेब बिजनेस में भी मनीकंट्रोल, बुक माय शो, होमशॉप, यात्रा, फर्स्टपोस्ट जैसे 13 पोर्टल शामिल रहे जो भारतीय बाजार में लीडर बन कर उभरे। क्रिसिल जैसी देश की सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसी के साथ भी महत्त्वपूर्ण गठबंधन किया। फिलहाल उन्होंने खुद की मीडिया कंपनी क्विंटिलोन शुरु की है जिसका गठबंधन ब्लूमबर्ग टीवी के साथ किया है।

शांत स्वभाव के राघव बहल फिल्में देखने क शौकीन हैं। अपने प्रोफेशनल जीवन में वे कई दर्जन अवॉर्ड व सम्मान पा चुके हैं। संस्कृति अवॉर्ड, ई वाई बिजनेस लीडर्स अवॉर्ड, फिक्की अवॉर्ड, ग्लोबल बिजनेस लीडर अवॉर्ड शामिल हैं। उन्हें इंडियन टेली अवॉर्ड का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी मिल चुका है। अमिटी युनिवर्सिटी ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी है। फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017 में  राघव बहल को भारतीय टीवी मीडिया के एक प्रमुख सरताज के तौर पर पाया गया है