दिन में पत्रकार, रात में उपन्यासकार बन जाते हैं राजकमल झा (फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017)

देश के सबसे तल्ख तेवरों वाले अखबार का दर्जा पा चुके ‘इंडियन एक्सप्रेस’ को हमेशा से उसकी आक्रामक छवि के लिये जाना जाता है तो इसके पीछे वजह उसके वैसे ही योग्य व कुशल संपादक भी रहे हैं। इन दिनों इसी परंपरा को निभा रहे हैं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लेखक व पत्रकार राज कमल झा। ‘नॉवेलिस्ट इन द न्यूज़रुम’ के नाम से मशहूर इंडियन एक्सप्रेस के इन चीफ एडीटर की बहुमुखी प्रतिभा के कायल उनके पाठक तो हैं ही, बड़े-बड़े उद्योगपति से लेकर राजनेता तक उनकी दूरदर्शिता पर भरोसा करते हैं।

वर्ष 1966 में बिहार के भागलपुर में जन्मे राज कमल झा की शुरुआती शिक्षा कोलकाता में हुई। इंटरमीडिएट के बाद उन्हें आईआईटी, खड़गपुर में दाखिला मिल गया, लेकिन जल्दी ही उन्हें यह अहसास हो गया कि उनकी अभिरुचि इंजीनियरिंग के मुकाबले अंग्रेजी में अधिक है। लेखनी पर जबर्दस्त पकड़ रखने के कारण वे थर्ड व फोर्थ इयर में कैंपस मैगज़ीन ‘अलंकार’ के एडीटर बनाये गये। 1988 में आईआईटी से मैकनिकल इंजीनियरिंग में ग्रैजुएट होने के बाद इन्हें युनिवर्सिटी ऑफ़ सदर्न कैलिफोर्निया में प्रिंट जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री के लिये फीस माफी का स्कॉलरशिप मिल गया।

वर्ष 1992 में इन्होंने द स्टेट्समैन, कोलकता में असिस्टेंट एडीटर के तौर पर अपने कॅरीयर की शुरुआत की। वर्ष 1994 में इंडिया टुडे में सीनियर एसोसिएट एडीटर के तौर पर ज्वाइन किया। वहां दो साल काम करने के बाद उन्होंने 1996 में इंडियन एक्सप्रेस के डिप्टी एडीटर पद पर ज्वाइन किया, लेकिन प्रमोशन पाकर एक्जिक्यूटिव एडीटर, मैनेजिंग एडीटर, एडीटर और फिर चीफ एडीटर बने। आज ये देश के सबसे उच्च स्तरीय इन्वेस्टिगेटिंग रिपोर्टिंग वाले समाचार पत्र के प्रधान संपादक हैं। राज कमल झा के नेतृत्व में ही अप्रैल 2016 में इंडियन एक्सप्रेस ने पनामा पेपर जैसे अंतर्राष्ट्रीय घपले को उजागर किया और भारत सरकार को इसमें शामिल भारत के बड़े लोगों और भारतीय कम्पनी के काले धन से जुड़ी सूची सौंपी।

पुरस्कार वापसी की शुरुआत हो या फिर रोहित वेमुला पर खुलासा, झा के सम्पादकीय साम्राज्य में खबरें रूकती नहीं हैं. उन्होंने महाराष्ट्र में सूखे से लेकर पंजाब में कीटनाशक के घोटाले पर सबसे पहले फोकस किया. कोयला घोटाले और 2 जी स्कैम पर भी झा के नेतृत्व में उनके रिपोर्टर्स ने बड़ी खोजी ख़बरें की हैं. रिपोर्टर्स को वो प्रेरणा देते हैं और इनवेस्टिगेटिव पत्रकारों को जिगर दिखाने की पूरी जगह भी।

विएना के इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट से एक्सीलेंस इन जर्नलिज्म के अवार्ड से सम्मानित इंडियन एक्सप्रेस के चीफ एडीटर राजकमल झा अन्तराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त नॉवेलिस्ट भी हैं। इनकी लिखी ‘द ब्लू बेडस्प्रेड’ को ‘कॉमनवेल्थ राइटर्स प्राइज’ और ‘न्यूयॉर्क टाइम्स नोटबुक ऑफ़ द इयर’ से सम्मानित किया गया। वे खुद को फैक्ट और फिक्शन के बीच की कड़ी मानते हैं। राजकमल झा के लिखे तीन नॉवेल एक दर्जन से ज्यादा विदेशी भाषाओं में अनुवादित हुए हैं। इनकी एक और किताब को ‘क्रॉसवर्ड बुक अवार्ड 2003’ से नवाजा गया है। उन्हें पत्रकारिता के लियेे भी दर्जनों पुरस्कार व सम्मान मिल चुके हैं। फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017 में राज कमल झा को भारतीय टीवी मीडिया के एक प्रमुख सरताज के तौर पर पाया गया है।