नंबर वन बने रहने का जादू जानते हैं सुप्रिय प्रसाद (फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017)

देश के नंबर वन न्यूज चैनल आजतक के मैनेजिंग एडीटर सुप्रिय प्रसाद को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में शोमैन कहा जाता है। दिखने में बेहद शांत और गंभीर लेकिन हर पल चौकस। खबरों को बेहतर और आधुनिक तकनीक से कैसे पेश किया जाये इस मामले में सुप्रिय प्रसाद का कोई जवाब नही है। सुप्रिय प्रसाद का एजेंडा है-सही खबर, सच्ची खबर और पूरी खबर। यही वजह कि पिछले करीब कई सालों से आजतक कामयाबी के शिखर पर खड़ा है।

झारखंड के दुमका के रहने वाले सुप्रिय प्रसाद के पिता सरकारी नौकरी में थे। वहीं से इन्होंने बीएससी ऑनर्स तक पढ़ाई की, लेकिन आँखों में सपना था पत्रकार बनने का। मौका मिला वर्ष 1989 में जब अपनी मां के इलाज के लिये पटना पहुंचे। वहां इनकी मुलाकात कुछ पत्रकारों से हुई। पहला मौका मिला प्रभात खबर में आर्टिकल लिखने का। उन दिनों में जब लालकृष्ण अडवाणी की रथ यात्रा समस्तीपुर पहुँची थी तो मौजूदा मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने उन्हें गिरफ्तार करवा दिया था। अडवाणी को दुमका जेल में नजरबंद कर दिया गया था तब दिल्ली से कई बड़े पत्रकार कवरेज के लिये दुमका पहुँचे। पत्रकारों की साख देख कर, सुप्रिय प्रसाद ने तय कर कि अब पत्रकार ही बनना है। मीडिया के सबसे अग्रणी संस्थान भारतीय जन संचार संस्थान (आईआईएमसी) से 1994 में पत्रकारिता का प्रशिक्षण लिया। टॉपर्स की फेहरिस्त में अपनी जगह भी बनायी। 10 जून 1995 को सुप्रिय बतौर ट्रेनी रिपोर्टर आजतक के साथ जुड़ गये।

ये वो दौर था जब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की दुनिया में आजतक के नाम से एक नयी क्रांति की शुरुआत होने जा रही थी। दिग्गज पत्रकार एसपी सिंह की अगुवाई में तब दूरदर्शन पर आधे घंटे के बुलेटिन के तौर पर आजतक की शुरुआत हुई। तब-तक सुप्रिय प्रसाद टीम की एक मजबूत कड़ी बन गये थे। वर्ष 2000 में आजतक 24 घंटे के न्यूज चैनल के अवतार में आया तो चैनल को कामयाबी दिलाने में परदे के पीछे सुप्रिय प्रसाद की सबसे अहम भूमिका रही। इन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में खबरों के ट्रीटमेंट का अंदाज बदल दिया। आजतक की टैगलाइन ‘सबसे तेज’ मानों सुप्रिय प्रसाद की शख्सियत में समा गयी है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में उन्होंने साबित किया है कि वही हैं सबसे तेज।

आजतक ही नहीं 2007 में जब न्यूज़ 24 चैनल का आगाज हुआ तो एक नयी चुनौती के साथ इन्होंने बतौर न्यूज डॉयरेक्टर ज्वाईन किया। इनकी कप्तानी में सभी नये चैनलों की रेस में न्यूज 24 आगे निकल आया और महज दो साल में एक लोकप्रिय चैनल बन गया। कंटेट और प्रोग्राम के मामले में न्यूज 24 बड़े चैनलों को टक्कर देने लगा, लेकिन फिर 2011 में सुप्रिय प्रसाद ने आजतक वापस ज्वाइन कर लिया।

पिछले बाइस वर्षों में सुप्रिय प्रसाद इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक मजबूत हस्ताक्षर बन चुके हैं। खबरों को लेकर उनकी समझ, पूरी रिसर्च और शानदार ग्राफिक्स के साथ खबरों को पेश करने के उनके अंदाज की पूरी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की दुनिया कायल है। सुप्रिय प्रसाद की शानदार कप्तानी में आजतक पिछले करीब छह साल से नंबर वन है। हर हफ्ते चैनलों की धड़कन नापने वाली एजेंसी टैम हो या बार्क, सबकी रेटिंग में आजतक की बादशाहत कायम रही।

आजतक के माइल स्टोन शो-एजेंडा आजतक, पंचायत आजतक, रंगरसिया, थर्ड डिग्री और वंदे मातरम जैसे शो सुप्रिय प्रसाद की सोच का परिणाम हैं। नरेंद्र मोदी की सरकार के एक साल पूरे होने पर सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करने के लिये आजतक ने सौ सांसदों को एक मंच पर जुटाया, तो इसके पीछे भी सुप्रिय प्रसाद का तेज दिमाग था। साल 2015 में क्रिकेट विश्वकप का आयोजन हुआ तो सुप्रिय प्रसाद आजतक पर क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को ले आये। ये सुप्रिय प्रसाद की सोच थी, कि देश के सबसे बड़े चैनल पर वर्ल्ड कप के मुकाबलों में अपनी राय देने के लिये दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेटर होना चाहिये। सही मायने में खबरों की दुनिया के सिकंदर हैं सुप्रिय प्रसाद।

डाउन टू अर्थ रहने वाले सुप्रिय प्रसाद अपनी हर कामयाबी का श्रेय अपनी टीम को देते हैं। शायद यही वजह है कि इनके साथ काम करने वाला हर शख्स इनका बेपनाह दीवाना है। बड़ी से बड़ी बात आसानी से लोगों को समझा देना इनकी खूबियों में शामिल है। सुप्रिय प्रसाद को पत्रकारिता संबंधी कई अवॉर्ड मिल चुके हैं जिनमें ईएनबीए, आईटीए और एनटी अवॉर्ड प्रमुख हैं। उन्हें 2014 में बेस्ट चैनल एडीटर का अवॉर्ड मिल चुका है और उनके नेतृत्त्व में आजतक ने कई बार सर्वश्रेष्ठ चैनल का पुरस्कार प्राप्त किया है। फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017 में सुप्रिय प्रसाद को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एक प्रमुख सरताज के तौर पर पाया गया है।