सत्ता के गलियारों की असली खबर बताते हैं सुरेश मेहरोत्रा (फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017)

सरकारी नीतियां बनाने, उन्हें कार्यरूप देने और प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त रखने के काम में देश के हजारों नौकरशाहों और लाखों कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग शामिल रहता है, लेकिन अमूमन मेन-स्ट्रीम मीडिया उनकी निजी खोज-खबर कम ही लेता है। इसी कमी को पूरा करने के लिये भोपाल के एक पत्रकार डॉ. सुरेश मेहरोत्रा ने इंटरनेट का सहारा लिया और ‘विश्पर्स इन द कॉरीडोर्स डॉट कॉम‘ नामक पोर्टल की शुरुआत कर दी। आज ये वेब ऐड्रेस देश के नौकरशाहों के बीच उनकी खबरों के लिये सबसे भरोसेमंद ठिकाना है।

भोपाल के निवासी डॉ. सुरेश मेहरोत्रा ने यह वेबसाइट 16 मार्च 2001 को शुरु की थी। उन्होंने इससे पहले करीब 25 वर्षों तक विभिन्न अखबारों में विभिन्न पदों पर काम किया। वे अंग्रेजी दैनिक नैशनल मेल और हिन्दी दैनिक नई दुनिया में संपादकीय पदों पर रहे। इसके पहले वे यूएनआई, फ्री प्रेस जर्नल, दैनिक भास्कर और हिन्दुस्तान टाइम्स से जुड़े रहे हैं। ब्युरोक्रैसी उनका प्रिय विषय था और वे इस वेबसाइट की लॉंचिंग से पहले इससे संबंधित कॉलम और लेख भी लिखा करते थे।

2001 में डॉ. सुरेश मेहरोत्रा ने महज एक कंप्युटर से यह पोर्टल शुरु किया था और उस समय स्टाफ के नाम पर उनके साथ केवल एक कंप्युटर ऑपरेटर था। डॉ. मेहरोत्रा कहते हैं, “हर कोई सोचता था कि हम ये पोर्टल सेक्रेटेरियट या किसी आलीशान ऑफिस से चलाते होंगे, जबकि सच्चाई यह थी कि मैंने अपने घर के ही एक कमरे में ऑफिस बना रखा था और वहीं से इसे चलाता था।” आज भी इस पोर्टल के ऑफिस में मात्र दो कंप्युटर हैं।

डॉ. सुरेश मेहरोत्रा ने इस पोर्टल को एक जुनून की तरह शुरु किया। शुरुआत में इसे कोई जानता भी नहीं था, लेकिन इसकी खबरों की धार और सटीक जानकारी के कारण इसकी चर्चा नौकरशाही और सत्ता के गलियारों में फैलने लगी। कई आईएएस, आईपीएस और विदेशों में पोस्टेड आईएफएस अधिकारी तो इसके जबर्दस्त फैन हैं। डॉ. मेहरोत्रा का दावा है कि भारतीय दूतावासों में, वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक जैसे प्रमुख संस्थानों में पोस्टेड अधिकारियों और कर्मचारियों के लिये तो यह पोर्टल ही उनकी निजी जानकारी का एकमात्र जरिया है।

वन मैन शो की तरह पोर्टल चलाने वाले डॉ. सुरेश मेहरोत्रा के सूत्र सरकारी पोर्टल और उच्च पदों पर बैठे कई पदाधिकारी भी हैं। इस पोर्टल की चर्चा देश-विदेश में हो रही है और हाल ही में इसने चार करोड़ हिट्स का आंकड़ा पार किया है। इस वेबसाइट की रैंकिंग भी काफी सम्मानजनक है। इसमें किसी बिजनेस हाउस या कारोबारी का पैसा नहीं लगा है और इसकी निष्पक्षता पर कभी किसी ने उंगली नहीं उठायी। डॉ. मेहरोत्रा के पास सैकड़ों की संख्या में ईमेल आते हैं और उनमें से अधिकतर तारीफों से भरे होते हैं। डॉ. मेहरोत्रा इसे अपनी चालीस वर्षों के पत्रकारिता के अनुभव और इंटरनेट की ताकत को इसकी लोकप्रियता का कारण मानते हैं।

इस पोर्टल के जरिये डॉ. सुरेश मेहरोत्रा ने कई भ्रष्टाचारी अधिकारियों का राजफाश भी किया है और इनकी रिपोर्ट के सहारे उनपर कार्रवाई भी हुई है। डॉ, मेहरोत्रा का कहना है कि उनके द्वारा किसी गलत काम को एक्सपोज करने का हर किसी ने स्वागत किया है। वे इसे वेब की ताकत मानते हैं और इसे ही सच्ची सूचना क्रांति कहते हैं। हालांकि डॉ. मेहरोत्रा को चाहने वाले पाठक उन्हें एक मिशनरी समाज-सुधारक मानते हैं लेकिन वे खुद को एक सेवक भर मानते हैं। उनका कहना है कि वे देश को समर्पित नीति निर्धारकों और कार्यपालकों का सेवा कर रहे हैं और जब जरूरत पड़ती है तभी किसी भ्रष्टाचारी का नकाब हटाते हैं। उनका मानना है कि पॉजिटिव सोच रखने वाले अधिकारियों की प्रशंसा भी आवश्यक है क्योंकि इससे उनका हौसला भी बढ़ता है और अधिक अच्छा करने की प्रेरणा मिलती है। फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017 में सुरेन्द्र मेहरोत्रा को वेब मीडिया के एक प्रमुख सरताज के तौर पर पाया गया है।