भारतीय टीवी जर्नलिज्म की दिशा निर्धारित की है डॉ. प्रणॅय रॉय ने (फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017)

डॉ. प्रणॅय रॉय एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्होंने भारत की टीवी पत्रकारिता को नया आयाम दिया है। वह उन चंद चोटी के शुरुआती टीवी पत्रकारों में से हैं जिन्हें भारतीय टीवी पत्रकारिता का पथ-प्रदर्शक माना जा सकता है। वे एनडीटीवी चैनलों के मालिक हैं और उनके मीडिया समूह को समाज में एक विशिष्ट दर्जा प्राप्त है। इतने सारे समाचार चैनलों के मौजूद होने के बावजूद अगर आज भी देश के इंटेक्चुअल क्लास को कोई खबर देखनी होती है तो वह एनडीटीवी का ही सहारा लेता है।

कोलकाता के एक संपन्न घर में 15 अक्टूबर 1949 को जन्मे प्रणॅय लाल रॉय के पिता हरिकेन लाल रॉय एक ब्रिटिश कंपनी में उच्च पद पर थे। उनकी मां आयरिश मूल की थीं और कोलकाता में टीचर थीं। उनके दादा परेश लाल रॉय को भारत में बॉक्सिंग का जनक कहा जाता है क्योंकि उन्होंने 1928 में भारतीय लोगों के लिये इस खेल का ट्रेनिंग सेंटर खोला था और बाद में कई प्रतियोगिताएं भी शुरु करवायीं। इतना ही नहीं उनके दादा के भाई इंद्रलाल राय पहले भारतीय पायलट थे जिन्होंने फर्स्ट वर्ल्ड वार में हिस्सा लिया था।

प्रणॅय रॉय की शुरुआती शिक्षा प्रतिष्ठित दून स्कूल में हुई। वहां से उन्हें ब्रिटेन के हैलीबरी एंड इंपीरियल कॉलेज में स्कॉलरशिप मिली तो वे लंदन चले गये जहां क्वीन मेरी कॉलेज से फर्स्ट क्लास में ग्रैजुएशन किया। फिर वहीं से ब्रिटिश चार्टर्ड अकाउंटेट बन कर वापस लौटे। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से अर्थशास्त्र में पीएचडी भी हासिल किया है।

डॉ. प्रणय रॉय ने दूरदर्शन के एंकर और चुनाव विशेषज्ञ के तौर पर अपना कॅरीयर शुरु किया। 1988 में उन्होंने अपनी पत्नी राधिका रॉय के साथ मिलकर ‘न्यू डेल्ही टेली-विजन’ (एनडीटीवी) के नाम से एक प्रोडक्शन हाउस की शुरुआत की। उन्होंने एनडीटीवी के बैनर तले कई प्रोग्राम बनाये जिनमें ‘द वर्ल्ड दिस वीक’ और ‘द न्यूज़ टुनाइट’ जैसे यादगार कार्यक्रम भी शामिल हैं। जब रुपर्ट मर्डोक ने स्टार नेटवर्क के बैनर तले मार्च 2004 में स्टार न्यूज चैनल की शुरुआत की तो कंटेंट का जिम्मा एनडीटीवी को ही मिला था। यह हिन्दी और अंग्रेजी बुलेटिनों का मिला-जुला चैनल था।

स्टार से एक साल का अनुबंध खत्म होने के बाद 2005 में एनडीटीवी ने अपने खुद के हिन्दी व अंग्रेजी न्यूज़ चैनलों की शुरुआत की। इसके साथ-साथ 2005 में ही एनडीटीवी-एटीएन के नाम से कनाडा में दक्षिण एशिया की खबरों का चैनल भी इसी बैनर से शुरु हुआ। बाद में एनडीटीवी प्रॉफिट और गुड टाइम्स जैसे चैनल भी शुरु हुए और इस कंपनी ने कई दूसरे चैनलों के लिये भी यादगार प्रोग्राम बनाये। कम लोगों को मालूम होगा कि ‘ज़ी टीवी’ पर चले सुपर हिट प्रोग्राम ‘जीना इसी का नाम है’ को एनडीटीवी ने ही बनाया था।

डॉ. प्रणॅय रॉय ने इंटरटेनमेंट चैनल, रेडियो और न्यूज़ पोर्टल आदि कई विधाओं में उम्दा शुरुआत की और अग्रणी बन कर दिखाया। लोगों के बीच यह धारणा स्थापित हो गयी है कि अगर प्रणॅय रॉय किसी वेंचर से जुड़ते हैं तो उसकी क्वालिटी उम्दा ही होगी।

डॉ. प्रणॅय रॉय अपने वेंचर्स के जरिये सोशल समस्याओं को उठाकर एक नयी मिसाल पेश कर रहे हैं। उनके शो ‘ग्रीनाथन’, ‘7 वंडर्स ऑफ़ इंडिया’ और ‘सेव अवर टाइगर’ कैम्पेन ने अलग तरह की पत्रकारिता की झलक दिखायी। इन शोज़ को बेस्ट पब्लिक सर्विस कैम्पेन 2011 का अवार्ड मिला। इतना ही नहीं, चैनल के शो ‘सपोर्ट माई स्कूल’ और ‘मार्क फॉर स्पोर्ट्स’ कैम्पेन 2010 और 2011 के बेस्ट शो थे। 2011 में ही एनडीटीवी ने ‘जीने की आशा’ नामक अनोखा कैम्पेन चलाया जो मेंटली रिटार्टेड बच्चों और चाइल्डकेयर पर आधारित था। यह शो भी अपनी तरह का अलग शो था और भारतीय इतिहास में यादगार बन गया।

भारतीय टेलीविज़न में उत्कृष्ट योगदान के लिये डॉ. प्रणॅय रॉय को अप्सरा पुरस्कार, प्रतिष्ठित लाल बहादुर शास्त्री नेशनल अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेसन, एकेडमिक्स एंड मैनेजमेंट- 2015, रेडइंक लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है। इतना ही नहीं, भारत सरकार की प्रणॅय रॉय फाइनैंस मिनिस्ट्री के इकोनॉमिक एडवायज़र भी रह चुके हैं और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के एसोसिएट प्रोपेसर भी। वे उन दो भारतीयों में शामिल हैं जो 2009 में वाशिंगटन में इंटरनेशनल एडवाइजरी बोर्ड ऑफ़ काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशन के मेम्बर रह चुके हैं। फेम इंडिया-एशिया पोस्ट मीडिया सर्वे 2017 में डॉ. प्रणॅय रॉय मीडिया के एक प्रमुख सरताज़ के तौर पर पाया गया है।